Monday, 16 April 2018

कैंसर का इलाज होम्योपैथी में भी संभव


सामान्यत: हमारे शरीर में नई-नई कोशिकाओं का हमेशा निर्माण होता रहता हैं, परन्तु कभी-कभी इन कोशिकाओं की अनियंत्रित गति से वृद्धि होने लगती हैं और यही सेल्स जो अधिक मात्रा में होती हैं एक ट्यूमर के रूप में बन जाती हैं जो कैंसर कहलाता हैं। इसे कार्सिनोमा, नियोप्लास्म और मेलिगनेंसी भी कहते हैं। लगभग 100 प्रकार के कैंसर होते हैं, और सभी के लक्षण अलग-अलग होते हैं। एक अंग में कैंसर होने पर ये दुसरे अंगो में भी फैलने लगता हैं। सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते हैं।

कैंसर के प्रकार

कुछ वर्ष पहले तक कैंसर एक जानलेवा बीमारी समझी जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है की अगर कैंसर को शुरूआती चरण में पकड़ लिया गया तो उस पर काफी प्रतिशत मामलों में काबू पाया जा सकता है एवं मरीज की जान बचाई जा सकती है। कैंसर कई प्रकार के होते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी की कैंसर लगभग सौ से भी ज्यादा प्रकार के होते हैं लेकिन आम तौर पर कैंसर के जो प्रमुख प्रकार होते हैं उनका विवरण यहाँ दिया जा रहा है।

त्वचा का कैंसर

त्वचा का कैंसर स्त्री एवं पुरुष, दोनों को अपना शिकार बनाने वाला सबसे सामान्य प्रकार का कैंसर है। हर साल लाखों स्त्री पुरुष के बारे में पता चलता है जो त्वचा के कैंसर के शिकार होते हैं। इसलिए अगर आपको त्वचा के कैंसर से बचना है तो आपको तेज धुप एवं प्रदुषण से खुद को बचाना होगा।

ब्लड कैंसर

इस प्रकार का कैंसर भी सामान्य है लेकिन त्वचा के कैंसर जितना नहीं। ल्यूकेमिया एक प्रकार ब्लड कैंसर होता है जो रक्त कोशिकाओं के कैंसरस हो जाने के कारण होता है। बोन मेरो के भीतर मौजूद कोशिकाएं लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं एवं प्लेटलेट्स को जन्म देती हैं जो कई बार कैंसरस हो सकती हैं जिनसे ल्यूकेमिया नामक कैंसर होता है। जो व्यक्ति ल्यूकेमिया के शिकार होते हैं उनका वजन कम होने लगता है; उनमें खून की कमी होने लगती है; उन्हें रातों को पसीना आने लगता है और न समझ में आने वाला बुखार रहने लगता है।

हड्डियों का कैंसर

इस प्रकार का कैंसर ज्यादातर बच्चों एवं बड़ों को अपना शिकार बनाता है लेकिन हड्डियों का कैंसर अन्य कैंसर की तरह आम नहीं है और इसके बहुत कम मामले पाए जातें हैं। कैल्सियम का भरपूर मात्रा में सेवन करते रहने से इस प्रकार के कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है लेकिन कैल्सियम के सेवन से हीं आप इस प्रकार के कैंसर से बचे रह जायेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि यह कई कारणों से होता है।

ब्रेन कैंसर

ब्रेन कैंसर दो प्रकार के होते हैं- एक कैंसरस होता है एवं दूसरा नन कैंसरस। ब्रेन कैंसर बच्चे या बड़े यानि किसी को भी हो सकता है और इसके होने के कई ऐसे कारण होते हैं जिन्हें रोक पाना इंसान के बस में नहीं होता है। ब्रेन कैंसर को ब्रेन ट्यूमर के नाम से भी जाना जाता है। कैंसरस ब्रेन ट्यूमर को यदि रोका नहीं गया तो दिमाग के एवं शरीर के अन्य भागो तक भी पहुँच सकता है।

स्तन कैंसर

स्तन कैंसर ज्यादातर महिलाओं को अपना शिकार बनता है। यूँ तो पुरुषों को भी स्तन कैंसर हो सकता है लेकिन ऐसा बहुत कम होता है। स्तन कैंसर की शिकार आमतौर पर महिलाएं हीं होती हैं। यूनाइटेड स्टेट्स में हर वर्ष लगभग 2 लाख मामले ऐसे आते हैं जिनमें महिलाएं स्तन कैंसर की शिकार पाई जाती हैं। अपने स्तन की नियमित रूप से जांच करते रहने से इस प्रकार के कैंसर से बचा जा सकता है। उचित समय पर विवाह एवं बच्चों के जन्म से भी इस प्रकार के कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है। लेकिन स्तन कैंसर कई कारणों से हो सकता है जिनमें से कई कारण आपके बस में नहीं होते। ऐसे में उचित इलाज हीं इसका एकमात्र उपाय है।

मुख का कैंसर

मुख का कैंसर आम तौर पर सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि के सेवन से होता है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जो लोग सिगरेट-तम्बाकू का सेवन नहीं करते उन्हें मुख का कैंसर नहीं हो सकता। लेकिन ऐसे लोगों को मुख का कैंसर होने की संभावना 50 प्रतिशत कम हो जाती है।

गले का कैंसर

गले का कैंसर भी आमतौर पर पाया जाने वाला एक प्रकार का  कैंसर है जिसके शिकार कई लोग हर साल होते हैं। इसके होने के भी मुख्यत: वही कारण  होते हैं जो मुख के कैंसर को जन्म देते हैं मसलन सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि का सेवन।

फेफड़ों का कैंसर

कई लोगों में फेफड़ों का कैंसर भी पाया जाता है आर इसके कारण  भी सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि का सेवन हो सकता हैं।
पैनक्रियाटिक कैंसर
यह कैंसर पैनक्रियाज यानि अग्नाशय को अपना शिकार बनाता है। इसके मामले स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, हड्डियों का कैंसर के मुकाबले बहुत कम पाए जाते हैं। हाल हीं में विश्व प्रसिद्द स्टेव जोब्स इसके शिकार पाए गए थे जिनका कई सालों तक इलाज चला और अंतत: जिनकी मृत्यु हो गई।
उपरोक्त विभिन्न प्रकार के कैंसर के अलावा कुछ अन्य सामान्य कैंसर के प्रकार जैसे- गुदा का कैंसर, उदर का कैंसर, आँखों का कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर, पौरुष ग्रंथि यानि प्रोस्टेट कैंसर, वृषण यानि टेस्टीक्युलर कैंसर  इत्यादि।

कैंसर की चिकित्सा के लिए होम्योपैथी

कैंसर सबसे भयानक रोगों में से एक है। कैंसर के रोग की परंपरागत औषधियों में निरंतर प्रगति के बावूद इसे अभी तक अत्यधिक अस्वस्थता और  मृत्यु के साथ जोडा़ जाता है और कैंसर के उपचार से अनेक दुष्प्रभाव जुडे हुए हैं। कैंसर के मरीज कैंसर पेलिएशन, कैंसर उपचार से होनेवाले दुष्प्रभावों के उपचार के लिए, या शायद कैंसर के उपचार के लिए भी अक्सर परंपरागत उपचार के साथ साथ होम्योपैथी चिकित्सा को भी जोडते हैं।
दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए होम्योपैथी चिकित्सा
रेडिएशन थैरेपी, कीमोथैरेपी और हॉर्मोन थैरेपी जैसे परंपरागत कैंसर के उपचार से अनेकों दुष्प्रभाव पैदा होते हैं। ये दुष्प्रभाव हैं - संक्रमण, उल्टी होना, जी मितलाना, मुंह में छाले होना, बालों का झडऩा, अवसाद (डिप्रेशन), और कमजोरी महसूस होना। होम्योपैथी उपचार से इन लक्षणों और दुष्प्रभावों  को नियंत्रण में लाया जा सकता है। रेडियोथेरेपी के दौरान अत्यधिक त्वचा शोध (डर्मटाइटिस) के लिए 'टॉपिकल केलेंडुलाÓ जैसा होम्योपैथी उपचार और  केमोथेरेपी-इंडुस्ड स्टोमाटाटिस के उपचार में 'ट्राउमील एस माऊथवाशÓ का प्रयोग असरकारक पाया जाता है।

कैंसर के लिए होम्योपैथी उपचार

होम्योपैथी उपचार सुरक्षित हैं और कुछ विश्वसनीय शोधों के अनुसार कैंसर और उसके दुष्प्रभावों के इलाज के लिए होम्योपैथी उपचार असरदायक हैं। यह उपचार आपको आराम दिलाने में मदद करता है और तनाव, अवसाद, बैचेनी का सामना करने में आपकी मदद करता है। यह अन्य लक्षणों और उल्टी, मुंह के छाले, बालों का झडऩा, अवसाद और कमोरी जैसे दुष्प्रभावों को घटाता है। ये औषधियां दर्द को कम करती हैं, उत्साह बढा़ती हैं और तन्दुरस्ती का बोध कराती हैं, कैंसर के प्रसार को नियंत्रित करती हैं, और प्रतिरोधक क्षमता को बढाती हैं। कैंसर के रोग के लिए एलोपैथी उपचार के उपयोग के साथ-साथ होम्योपैथी चिकित्सा का भी एक पूरक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। एलोपैथी उपचार के साथ साथ होम्योपैथी दवाईयां ब्रेन ट्यूमर, अनेक प्रकार के कैंसर जैसे के गाल, जीभ, भोजन नली, पाचक ग्रन्थि, मलाशय, अंडाशय, गर्भाशय; मूत्राशय, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट ग्रंथि के कैन्सर के उपचार में उपयोगी पाई गई हैं।

Thursday, 12 October 2017

आर्थराइटिस के दर्द को कम करने के लिए न खाएं ये फूड्स



र्थराइटिस...कहने को तो यह 40 साल के बाद होता है, लेकिन आज की जीवनशैली के चलते, इसकी चपेट में 35 से ऊपर के लोग भी हैं। यह ज़्यादातर महिलाओं को होता है, लेकिन पुरुष भी इसके शिकार होते हैं। इसमें जोड़ों का दर्द होता है और उस अंग पर सूजन भी आ जाती है। हालांकि, इसके ट्रीटमेंट के लिए पेन-किलर्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन रिसर्च कहती है कि अगर डाइट में वो चीज़ें खाई ही न जाएं, जिनसे सूजन और जोड़ों का दर्द हो, तो इसे कंट्रोल में लाया जा सकता है। वैसे तो आर्थराइटिस 100 तरह का है, लेकिन सबसे ज़्यादा होते हैं- ऑस्टियो आर्थराइटिस और रुमेटॉयड आर्थराइटिस। जहां ऑस्टियो आर्थराइटिस का वार अक्सर उंगलियों, घुटनों और हिप्स पर होता है, वहीं रुमेटॉयड आर्थराइटिस हाथों और पैरों को दर्द से जकड़ लेता है। ऐसे में इन अंगों को दर्द के कारण हिलाने में भी दिक्कत होती है। अगर कोई फैमिली हिस्ट्री हो तो, इसका रिस्क ज़्यादा हो जाता है। इसका कोई पक्का इलाज तो नहीं है, लेकिन इसे प्रॉपर मेडिकेशन और डाइट की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है।

आर्थराइटिस के संकेत

 जोड़ों में दर्द  लाली  सूजन  अंगों का काम न करना  अकडऩ

ट्रीटमेंट

आराम करना  ठंडी या गर्म सिकाई  वजऩ कम करना  एक्सरसाइज़  जॉएंट रिप्लेसमेंट
इसके अलावा, ये हैं 5 फूड्स जिन्हें आर्थराइटिस के रोगियों को खाने से बचना चाहिए।

तला हुआ या पैकेज्ड फूड

रिसर्च के मुताबिक अगर डाइट में तला हुआ और पैकेज्ड खाना जैसे- फ्राइड मीट, फ्रोजऩ वेजिटेबल्स नहीं ले जाएं और इनकी जगह फ्रेश फ्रूट्स और वेजिटेबल्स खाए जाएं, तो सूजन और दर्द को कम किया जा सकता है।

ओवर-हीटिड फूड

साल 2009 में हुई एक स्टडी में सामने आया की आर्थराइटिस के रोगियों को ओवर-हीटेड और ग्रिल्ड खाना खाने से भी बचना चाहिए। यानी खाने को ज़्यादा टेम्परेचर पर नहीं बनाना चाहिए।

शुगर

ज़रूरत से ज़्यादा कोई भी चीज़ शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, फिर चाहे वो पानी हो, नमक या चीनी। ज़्यादा मीठा खाने से भी सूजन बढ़ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि अपनी डाइट से केक, सोडा, चॉकलेट, मैदा आदि आउट कर दें।

डेयरी प्रोडक्ट्स

कहने को तो दूध, दही शरीर के लिए लाभदायक हैं। इनसे कैल्शियम मिलता है। लेकिन आर्थराइटिस के शिकार लोगों की हेल्थ के लिए ये बिलकुल भी हेल्दी नहीं है। रिसर्च में पाया गया है कि इन डेयरी प्रोडक्ट्स में कोई ऐसा प्रोटीन होता है जो जोड़ों का दर्द तेज़ करता है। ऐसे में शरीर में प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए, मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स की जगह पालक, टोफू, बीन्स और दाल ज़्यादा से ज़्यादा खानी चाहिए।

अल्कोहल और टबैको

शराब और तंबाकू शरीर के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनसे जोड़ों का दर्द तो तेज़ होता ही है, साथ ही शरीर को कई खतरनाक बीमारियां भी लग सकती हैं। हेल्दी जाएंट्स के लिए ज़रूरी है बैलेंस्ड डाइट, एक्सरसाइज़ और रेस्ट।

Tuesday, 4 July 2017

मानसून में रखें सेहत का ख्याल



चिलचिलाती गर्मी के बाद जब मानसून की ठंडी फुहार हर किसी के चेहरे पर खुशी ले आती है। बच्चों को तो बारिश में भीगना बहुत भाता है। पर ध्यान रहे, यही बारिश कई तरह की बीमारियों को भी साथ लाती है। 
आमतौर पर हम सभी को मानसून का मौसम बहुत ही पसंद होता है, क्योंकि यह रोमांटिक और एडवेंचर्स भरा होता है। बादलों से भरा आसमान, मूसलधार बारिश और चारों तरफ हरियाली से भरा यह मौसम बहुत ही आनंद देने वाला और गर्मी से राहत देने वाला होता है।
बारिश के दिनों में लोगों को तेल में तले हुए भजिए खाना बहुत अच्छा लगता है। इस मौसम में लोग चाय, कॉफी, सूप पीना भी बहुत पसंद करते हैं और कुछ लोग स्ट्रीट-फूड के भी शौकीन होते हैं, मगर इस बरसात के मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल करना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह मानसून अपने साथ कुछ नकारात्मकता भी लाता है। कई लोग इस दौरान बीमार हो जाते हैं, क्योंकि नमी के दिनों में कीड़े, संक्रमण आदि का ज्यादा डर होता है और इस वजह से डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, जुकाम, फ्लू, निमोनिया आदि जैसी बीमारियां होने की संभावना बन जाती है।
अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो बारिश में भीगने से आपको जुकाम भी हो सकता है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों और कामकाजी लोगों को इस मौसम में घर से बाहर निकलना ही पड़ता है, मगर कुछ सावधानियां बरतकर आप इन बीमारियों से बच सकते हैं। आइए, अच्छी सेहत के लिए जानते हैं-
बारिश के मौसम में अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए हम आपको कुछ महत्वपूर्ण टिप्स बता रहे हैं-

आवश्यक वस्तुएं रखें साथ

अचानक होने वाली मूसलधार बारिश से बचने के लिए अपने साथ एक छाता अवश्य रखें, क्योंकि ऐसे मौसम में बारिश का कोई भरोसा नहीं होता है। अगर आप घर से कहीं बाहर हैं और पैदल, बाइक या स्कूटर से यात्रा कर रहे हैं तो अपने साथ रैनकोट रखना न भूलें।

स्ट्रीट-फूड से बचें

मानसून के मौसम में लोग तला हुआ खाना और स्ट्रीट-फूड खाना बहुत पसंद करते हैं, पर इस दौरान कई बार बारिश का कुछ पानी तेल में मिल जाता है, इसलिए ऐसे समय में मिनरल पानी ही पीना चाहिए और स्ट्रीट-फूड, तले हुए पदार्थ, ज्यूस और पेय पदार्थों से परहेज रखना चाहिए, क्योंकि बारिश के पानी में कई अशुद्ध लवण होते हैं, जो इन पदार्थों में मिलकर उन्हें दूषित कर देते हैं और इस वजह से हमें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

मच्छरों के प्रकोप से बचें

बरसात के दिनों में मच्छरों की आबादी में बहुत ज्यादा वृद्धि हो जाती है, क्योंकि ऐसे समय में पानी बहुत ज्यादा हो जाता है, जो कि मच्छरों के एक अच्छी प्रजजन भूमि का काम करता है। अपने घर में कूलर के पानी को अच्छे से जांच लें और रोजाना उस पानी को बदलें। घर के अन्य क्षेत्र जैसे कि फूल के बर्तन, एक्वेरियम और कुए में भी पानी एकत्रित रहता है, इन्हें किसी कीटाणुनाशक का प्रयोगकर साफ करें और ढंककर रखें।
हर्बल-टी पीएं
मानसून के मौसम में हर्बल-टी का सेवन करें, क्योंकि इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह हमारी प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं और कीटाणुओं, जीवाणुओं के खिलाफ लडऩे की ताकत प्रदान करते हैं, इसलिए क्कह्म्द्गष्ड्डह्वह्लद्बशठ्ठह्य ष्ठह्वह्म्द्बठ्ठद्द क्रड्डद्बठ्ठ4 स्द्गड्डह्यशठ्ठ रखने के लिए हर्बल-टी रोज पिएं।


स्क्रैचिंग से बचें

यदि आपको मच्छर ने काट लिया है तो उसे खुजालने से या स्क्रैचिंग से बचें, क्योंकि यह वायरस नाक, शरीर या मुंह के माध्यम से आपके अंदर प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए मच्छर से काटे हुए प्रभावित क्षेत्र को जितना कम हो सके, उतना कम छुएं।
बीमारियों से बचने के लिए रूमाल का उपयोग करें। रूमाल को अपने साथ या अपनी जेब में रखना शिष्टाचार को दर्शाता है। बारिश के दिनों में जितना कम हो सके, अपने चेहरे को स्क्रेच करें या छुएं, क्योंकि फ्लू वायरस मुंह, आंख, नाक आदि के माध्यम से आपके अंदर प्रवेश कर सकते हैं,  इसलिए ध्यान रखें, जब भी जरूरत पड़े तो हाथ के बजाय रूमाल की मदद से चेहरे को पोछें या साफ करें और हाथों को चेहरे से दूर रखें।

त्वचा के संक्रमण से बचें

बरसात के दिनों में बहुत ही ज्यादा मात्रा में गटर, नालों में गंदा पानी एकत्रित हो जाता है और फिर सड़कों में फिर जमा होने लगता है। ऐसे में अगर आप नंगे पैर सड़कों में चलने लगते हैं तो यह दूषित और जहरीला पानी आपकी त्वचा में लगकर अवांछित त्वचा कर संक्रमण पैदा कर सकता है। इस मौसम में अपने शरीर का कोई भी भाग अगर खुला होता है तो उसमें गंदे पानी से होने वाले संक्रमण की संभावना अधिक होती है, इसलिए ॥द्गड्डद्यह्लद्ध ञ्जद्बश्च द्घशह्म् क्रड्डद्बठ्ठ4 स्द्गड्डह्यशठ्ठ के अनुसार घर से बाहर निकलते समय यह सुनिश्चित कर लें कि आपने अपने शरीर को ढंका है या नहीं और पैरों में भी जूते पहनकर उसे अवश्य ढंकें।

डायबिटीज और अस्थमा के मरीज

अगर आप या आपके कोई रिश्तेदार डायबिटीज और अस्थमा की बीमारी से पीडि़त हैं तो इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि बारिश के दिनों में पीडि़त गीली दीवारों के पास ना सोएं, क्योंकि गीली दीवार के पास सोने से शरीर के अंदर कवक के विकास को बढ़ावा मिलता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो सकता है।

हाथों को धोएं

बारिश के मौसम में आप हाथ धोने की बात को अनदेखा नहीं कर सकते, वर्ना यह आपके लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है, इसलिए इस मौसम में हाथों को नियमित रूप से धोते रहने से व्यक्ति स्वास्थ्य संकटों से दूर रहता है। ऐसा करने का मुख्य कारण यह है कि बारिश के दौरान कई तरह से बैक्टीरिया और वायरस सक्रिय हो जाते हैं और आपकी जानकारी के बिना किसी न किसी तरीके से ये आपके संपर्क में आ जाते हैं, इसलिए ध्यान रखें, रोजाना भोजन करने से पहले अपने हाथ को साबून से धोकर या सेनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।

Wednesday, 21 June 2017

योग का शरीर पर होने वाले प्रभाव


आयुुष मंत्री श्रीपाद नाईक से विशेष चर्चा


सेहत एवं सूरत के संपादक डॉ. ए.के. द्विवेदी की भारत के आयुष मंत्री श्रीपाद नाईक जी से योग तथा आयुष चिकित्सा पद्धतियों के विकास को लेकर चर्चा हुई जिसमें आयुष मंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा कि योग का जन्म भारत में ही हुआ और आज भारत में ही नहीं विश्व भर में योग का बोलबाला है और निसंदेह उसका श्रेय भारत के ही योग गुरूओं को  तथा भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जाता है जिन्होंने योग को फिर से पुनर्जीवित किया इसी तारतम्य में भारत में आयुष मंत्रालय के गठन पश्चात प्रत्येक वर्ष दिनांक २१ जून को विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में योग दिवस मुख्य समारोह आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मनाया जाना है। आपने कहा कि योग दिवस मनाने का उद्ेश्य है कि लोगों में योग के प्रति जागरूकता फैलाना तथा योगासन को अपनाकर स्वास्थ्य को हासिल करना है। 
सरकार योग के प्रचार-प्रसार और विभिन्न रोगों के इलाज से इसके चिकित्सीय प्रभावों के गहन अध्ययन के साथ इसके माध्यम से एक प्रभावी चिकित्सा व्यवस्था खड़ी करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
योगासन ऐसी पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोडऩे और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्व है। योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है। योगासनों द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बडिय़ां उत्पन्न नहीं होतीं। योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं। योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल व्यक्ति तंदरुस्त होता है।
योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं। वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सुघड़ता और गति, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं। योगासनों से बुद्धि की वृद्धि होती है और धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी मिलती है। ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्मा-सुधार के प्रयत्न बढ़ जाते हैं। योगासन स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, अत: मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है। योगासन श्वास- क्रिया का नियमन करते हैं, हृदय और फेफड़ों को बल देते हैं, रक्त को शुद्ध करते हैं और मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को बढ़ाते हैं। योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान स्वरूप हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं। आसन रोग विकारों को नष्ट करते हैं, रोगों से रक्षा करते हैं, शरीर को निरोग, स्वस्थ एवं बलिष्ठ बनाए रखते हैं। आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
योगासन से शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, जिससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है। आसन शरीर के पांच मुख्यांगों, स्नायु तंत्र, रक्ताभिगमन तंत्र, श्वासोच्छवास तंत्र की क्रियाओं का व्यवस्थित रूप से संचालन करते हैं जिससे शरीर पूर्णत: स्वस्थ बना रहता है और कोई रोग नहीं होने पाता। शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक सभी क्षेत्रों के विकास में आसनों का अधिकार है। अन्य व्यायाम पद्धतियां केवल बाह्य शरीर को ही प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं, जब कि योगासन मानव का चहुँमुखी विकास करते हैं।

सोचने की शक्ति बढ़ाता है स्वस्तिकासन



य दि आप ऑफिस और घर की समस्या से अत्यधिक तनाव महसूस कर रहे हैं तो स्वस्तिकासन आपको अवश्य राहत पहुंचाएगा। साथ ही यह आसन शरीर की मांसपेशियों और रीढ़ के लिए काफी फायदेमंद है।

स्वस्तिकासन की विधि

समतल स्थान पर कंबल या कोई कपड़ा बिछाकर बैठ जाएं। इसके बाद दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर सामान्य स्थिति में बाएं पैर के घुटने के बीच दबाकर रखें और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर की पिण्डली पर रखें। फिर दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखकर ज्ञान मुद्रा बनाएं। ज्ञान मुद्रा के लिए तीन अंगुलियों को खोलकर तथा अंगूठे व कनिष्का को मिलाकर रखें। अब अपने दृष्टि को नाक के अगले भाग पर स्थिर कर मन को एकाग्र करें। आसन की इस स्थिति में जितने देर संभव हो उतने देर रहें। इस आसन को करने से मन की एकाग्रत बढ़ती है। ध्यान लगाने से सोचने की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होती है। दिनभर मन शांत रहता है।

डायबिटीज से है परेशान करे कुर्मासन योग



आजकल कई लोगों को शुगर की प्रॉब्लम है एवं इसी वजह से उन्हें खान-पान में काफी ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। जब भी कभी कोई स्वीट डिश बने या फिर किसी अन्य तरह के पकवान तो मजाल है कि कोई उन्हें स्वाद चखने के लिए बोल दे। आज कई लोग ऐसे है जो डायबिटीज की वजह से घुट-घुट कर जी रहे हैं।
लम्बी चौड़ी दवाइयों की लिस्ट के साथ आज डॉक्टर रोगियों को कुर्मासन करने की भी सलाह देते हैं। यकीन मानिये कुर्मासन योग के नियमित उपयोग से डायबिटीज के साथ-साथ पेट के अन्य विकारों से भी काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।

कुर्मासन योग कैसे करें 

(1) इस आसन को करने से पहले सबसे पहले बज्रासन के अवस्था में बैठ जाये। इसके बाद अपनी कोहनियों को नाभि के दोनों और लगाये एवं हथेलियों को मिलाकर ऊपर की और सीधा करके ऊपर उठाये।
(2) इसके बाद हलकी-हलकी श्वास छोड़ते हुए सामने की और झुके तथा
(3) अपनी ठोड़ी को जमीन पर टिका दें।
(4 इस दौरान नजर सामने की ओर बनाये रखें तथा हथेली को ठोड़ी अथवा गालो से स्पर्श कराकर रखें।
(5) कुछ देर तक इसी अवस्था में बने रहें एवं बाद में हलके-हलके श्वास छोड़ते हुए दोबारा वज्रासन की अवस्था में लौट आये। कुछ देर बाद दोबारा कोशिश करें।
कुर्मासन योग के फायदे 
(1) ये आसन डायबिटीज से पीडि़त के लिए रामबाण के रूप में काम करती है।
(2) इससे पेट के लीवर, किडनी एवं पैंक्रियास को मजबूत बनाये रखने में सहायता मिलती है जिससे की पेट की पाचन सम्बंधित विकार नहीं पनपते।
(3) पैर, पीठ एवं मेरुदंड की हड्डियों में खिचाव लाकर ये आसन शरीर को फ्लेक्सिबल बनाये रखने में काफी मदद करता है।

Tuesday, 20 June 2017

महिलाओं को शारीरिक सुंदरता देता है गोमुखासन



आ जकल युवाओं में नशे या स्मोकिंग के बढ़ते क्रेज से टीबी जैसी जानलेवा बीमारी किसी को भी कभी भी हो सकती है। नशे के अतिरिक्त दूषित वातावरण के चलते भी सांस संबंधी बीमारियां होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए कुछ समय योगासन करने से ऐसी बीमारियों से बचा जा सकता है। वहीं असंतुलित खान-पान और अन्य कारणों के चलते कई महिलाओं का शरीर पूर्ण विकसित नहीं हो पाता है, उनके लिए भी यह काफी लाभदायक है। इस आसन के नियमित प्रयोग से महिलाओं को पूर्ण सौंदर्य प्राप्त होता है। साथ ही फेफड़ों से संबंधित बीमारियां तथा अन्य बीमारियों को दूर रखता है गोमुखासन।
इस आसन में हमारी स्थिति गाय के मुख के समान हो जाती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। स्वाध्याय एवं भजन, स्मरण आदि में इस आसन का प्रयोग किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी हैं।

गोमुखासन की विधि

किसी शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठकर जाएं। अब अपने बाएं पैर को घुटनों से मोड़कर दाएं पैर के नीचे से निकालते हुए एड़ी को पीछे की तरफ नितम्ब के पास सटाकर रखें। अब दाएं पैर को भी बाएं पैर के ऊपर रखकर एड़ी को पीछे नितम्ब के पास सटाकर रखें। इसके बाद बाएं हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर के बगल से पीठ के पीछे लें जाएं तथा दाहिने हाथ को कोहनी से मोड़कर कंधे के ऊपर सिर के पास पीछे की ओर ले जाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को हुक की तरह आपस में फंसा लें। सिर व रीढ़ को बिल्कुल सीधा रखें और सीने को भी तानकर रखें। इस स्थिति में कम से कम 2 मिनिट रुकें।
फिर हाथ व पैर की स्थिति बदलकर दूसरी तरफ भी इस आसन को इसी तरह करें। इसके बाद 2 मिनट तक आराम करें और पुन: आसन को करें। यह आसन दोनों तरफ से 4-4 बार करना चाहिए। सांस सामान्य रखें।

गोमुखासन के लाभ

इस आसन से फेफड़े से सम्बन्धी बीमारियों में विशेष लाभ होता है। इस आसन से छाती चौड़ी व मजबूत होती है। कंधों, घुटनों, जांघ, कुहनियों, कमर व टखनों को मजबूती मिलती है तथा हाथ, कंधों व पैर भी शक्तिशाली बनते हैं। इससे शरीर में ताजगी, स्फूर्ति व शक्ति का विकास होता हैं। यह आसन दमा (सांस के रोग) तथा क्षय (टी.बी.) के रोगियों को जरुर करना चाहिए। यह पीठ दर्द, वात रोग, कन्धें के कड़ेपन, अपच, हर्नियां तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है। यह अण्डकोष से सम्बन्धित रोग को दूर करता है। इससे प्रमेह, मूत्रकृच्छ, गठिया, मधुमेह, धातु विकार, स्वप्नदोष, शुक्र तारल्य आदि रोग खत्म होता है। यह गुर्दे के विषाक्त (विष वाला) द्रव्यों को बाहर निकालकर रुके हुए पेशाब को बाहर करता है। जिसके घुटनों मे दर्द रहता है या गुदा सम्बन्धित रोग है उन्हें भी गोमुखासन करना चाहिए।

महिलाओं के लिए विशेष लाभ

यह आसन उन महिलाओं को अवश्य करना चाहिए, जिनके स्तन किसी कारण से दबी, छोटी तथा अविकसित रह गई हो। यह स्त्रियों के सौन्दर्यता को बढ़ाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी हैं।